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Tuesday, April 12, 2011

             चंद लाईने 

रिस्तो में इसीलिए हो जाती है दुरी 
अपने ही चलाते है जब गर्दन पे छुरी
जितनी चादर हो उतने ही पांव फैला
हर खवाहिश इंसान की कब होती है पूरी 

चरणदीप अजमानी, पिथोरा 9993861181
Ajm.charan@gmail.com
Ajmani61181.blogspot.com

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