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Sunday, May 08, 2011

                  चंद लाईने 

हर  कदम पर् सहमी सहमी जिंदगी बनी रही
चराग जलाए हमने फिर भी तीरगी (अँधेरा) बनी रही
मुल्क के  एक गाँव में माह भर अँधेरा था 
संसद के गलियारे में रौशनी बनी रही  


चरणदीप अजमानी, पिथोरा 9993861181
Ajm.charan@gmail.com
Ajmani61181.blogspot.com

1 comment:

  1. तीखा व्यंग्य है. बधाई .

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