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Saturday, February 12, 2011





















( वेलेंटाइन डे अनुचित )

पिछले कुछ सालो से वेलेंटाइन डे का जबरदस्त 
प्रचार देखने को मिला है
मेरे नजरिये से ये बिलकुल अनुचित है 

प्यार एक ऐसा रिश्ता है जिसे लम्हों, पल ,
समय ,दिन या तारीख पर बांधना ठीक नहीं
वेलेंटाइन डे बाजारवाद की पैदा की हुई तारीख है .

प्रेम जो की एक सहज भाव है जो आपको माता-पिता,
भाई,बहन, गुरू किसी से भी हो सकता है
और समय के साथ बदल सकता है .

भविष्य के लिए किसी भी प्रकार की प्रतिबद्धता 
बाद में बंधन ,तनाव बन जाती है और यही वेलेंटाइन डे
की उपज है आज वेलेंटाइन डे का प्रेम 
अर्थशाष्त्र के नियम की तरह हो गया है
जबकि इसे समझने के लिए सम्वेंदनशीलता की जरुरत है .
आप कभी प्रकृति और जीवन से प्रेम करके देखे 

तो पता चले की वास्तविक प्रेम क्या है .
भारतीय संस्कृति के लोग अगर पश्चिम के 

अनुसार चले तो पहुचेगे कहाँ पर
हमे 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाने के बजाय 

माता-पिता पूजन दिवस मनाना चाहिए
हम वेलेंटाइन डे पर माता पिता को पूजे 

जो हमारे जीवन को प्रेम्मय बनाते है
 

श्री श्री रविशंकर ने कहा भी है
प्रेम को प्रेम ही रहने दो इसे कोई नाम ना दो


चरणदीप अजमानी, पिथौरा 9993861181
Ajm.charan@gmail.com
Ajmani61181.blogspot.com


1 comment:

  1. अच्छी रचना. बहुत अच्छी भावनाएं . आभार .

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